31Oct

मां लक्ष्मी की कृपा चाहते हैं तो शुक्रवार को करें ये उपाय

धन और संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं – माँ लक्ष्मी. माना जाता है समुद्र से इनका जन्म हुआ था, और इन्होने श्री विष्णु से विवाह किया था. इनकी पूजा से धन की प्राप्ति होती है साथ ही वैभव भी मिलता है. अगर लक्ष्मी रुष्ट हो जाएँ तो घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ता है. ज्योतिष में शुक्र ग्रह से इनका सम्बन्ध जोड़ा जाता है.

धन और संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं – माँ लक्ष्मी. माना जाता है समुद्र से इनका जन्म हुआ था, और इन्होंने श्री विष्णु से विवाह किया था. इनकी पूजा से धन की प्राप्ति होती है साथ ही वैभव भी मिलता है. अगर लक्ष्मी रुष्ट हो जाएँ तो घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ता है. ज्योतिष में शुक्र ग्रह से इनका सम्बन्ध जोड़ा जाता है.

इनकी पूजा से किन किन फलों की प्राप्ति होती है?

– इनकी पूजा से केवल धन ही नहीं बल्कि नाम यश भी मिलता है

– इनकी उपासना से दाम्पत्य जीवन भी बेहतर होता है

– कितनी भी धन की समस्या हो अगर विधिवत लक्ष्मी जी की पूजा की जाय तो धन मिलता ही है

माँ लक्ष्मी की पूजा के नियम और सावधानियां क्या हैं?

– माँ लक्ष्मी की पूजा श्वेत या गुलाबी वस्त्र पहन कर करनी चाहिए

– इनकी पूजा का उत्तम समय होता है – गोधूली वेला या मध्य रात्रि

– माँ लक्ष्मी के उस प्रतिकृति की पूजा करनी चाहिए जिसमे वह गुलाबी कमल के पुष्प पर बैठी हों

– साथ ही उनके हाथों से धन बरस रहा हो

– माँ लक्ष्मी को गुलाबी पुष्प विशेषकर कमल चढ़ाना सर्वोत्तम होगा

– माँ लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप स्फटिक की माला से करने पर वह तुरंत प्रभावशाली होता है

माँ लक्ष्मी की कृपा पाने के (धन पाने के) विशेष प्रयोग

व्यवसाय में लाभ पाने के लिए क्या करें?

– व्यवसाय के स्थान पर लक्ष्मी जी , गणेश जी और विष्णु जी की स्थापना करें

– लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर विष्णु जी की और बाएँ ओर गणेश जी को स्थापित करें

– नित्य प्रातः काम शुरू करने के पहले उनको एक गुलाब का फूल चढाएँ

– घी का दीपक और गुलाब की सुगंध वाली धूप जलाएँ

नौकरी में धन पाने के लिए क्या करें?

– पूजा के स्थान पर कमल के फूल पर बैठी हुई लक्ष्मी जी के चित्र की स्थापना करें

– इस चित्र में अगर दोनों तरफ से हाथी सूंढ़ में भरकर जल गिरा रहे हों तो और भी उत्तम होगा

– इस चित्र के सामने सायंकाल घी का दीपक जलाएँ , और माँ को इत्र अर्पित करें

– रोज शाम पूजा की समाप्ति के बाद तीन बार शंख जरूर बजाएँ

 

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